काल सर्प दोष पूजा - भक्ति रथ अनुष्ठान

मंगल भात पूजा क्या है?

मंगल भात पूजा एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है जो मंगल ग्रह (Mars) को शांत करने और कुंडली में मंगल दोष के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है. इस पूजा में चावल (भात) और अन्य पवित्र सामग्री के साथ मंगल देव की आराधना की जाती है. उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना जाता है, जो इस पूजा को अत्यंत प्रभावशाली और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बनाता है.

मंगल दोष के लक्षण और प्रभाव

मंगल दोष से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होती हैं:

  • विवाह में विलंब और बाधाएं – शादी में देरी या वैवाहिक प्रस्तावों में रुकावट​

  • वैवाहिक जीवन में कलह – पति-पत्नी के बीच विवाद और असामंजस्य​

  • करियर में समस्याएं – नौकरी और व्यवसाय में बाधाएं​

  • आर्थिक अस्थिरता – धन की हानि और वित्तीय चुनौतियां​

  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां – मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं​

  • पारिवारिक विवाद – घरेलू कलह और रिश्तों में तनाव​

  • निर्णय लेने में कठिनाई – मानसिक अशांति और भ्रम की स्थिति

शुद्ध वैदिक विधि

सभी पूजा-अनुष्ठान पूर्ण रूप से शास्त्रसम्मत विधि से अनुभवी वेदाचार्यों द्वारा संपन्न किए जाते हैं।

अनुभवी ज्योतिषाचार्य मार्गदर्शन

कुंडली के अनुसार सटीक परामर्श एवं दोष-निवारण पूजा, जिससे निश्चित और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

सरल पूजा बुकिंग सुविधा

ऑनलाइन एवं फोन के माध्यम से आसान पूजा बुकिंग, तिथि-मुहूर्त निर्धारण और संपूर्ण पूजा व्यवस्था एक ही स्थान पर।

मंगल भात पूजा विधि

पूजा की तैयारी

पूजा से पहले भक्त के नाम से संकल्प लिया जाता है. पूजा के लिए चावल, लाल फूल, लाल कपड़ा, चना दाल, मिठाई और फल जैसी आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जाती है. पुरुषों को धोती-कुर्ता और महिलाओं को साड़ी या पंजाबी ड्रेस पहननी चाहिए, काले और हरे रंग के कपड़े वर्जित हैं.​

मुख्य पूजा प्रक्रिया

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है जो विघ्नहर्ता हैं. फिर भगवान शिव और हनुमान जी का आवाहन किया जाता है. मंगल देव को चावल (भात), लाल फूल और चना दाल की आहुति दी जाती है. पंडित जी मंगल बीज मंत्र और विशेष मंत्रों का जाप करते हैं.​

समापन और प्रसाद

पूजा सामग्री को लाल कपड़े में लपेटा जाता है जो मंगल की अग्नि ऊर्जा का प्रतीक है. शिवलिंग पर चावल अर्पित किए जाते हैं. पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है और भक्त को आशीर्वाद प्राप्त होता है.​

मंगल भात पूजा के लाभ

वैवाहिक जीवन में सुधार

मंगल भात पूजा करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में शांति और सामंजस्य स्थापित होता है. मंगल दोष के कारण विवाह में हो रही देरी समाप्त होती है. पति-पत्नी के रिश्तों में मधुरता आती है और पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं.​

करियर और व्यवसाय में उन्नति

यह पूजा व्यावसायिक सफलता के द्वार खोलती है और करियर में प्रगति के अवसर प्रदान करती है. निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है और कार्यक्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ता है. नौकरी और व्यवसाय में आने वाली चुनौतियां दूर होती हैं.​

स्वास्थ्य और मानसिक शांति

पूजा के बाद शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन शक्ति में वृद्धि होती है. मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से मुक्ति मिलती है. मन में शांति और स्पष्टता आती है.​

आर्थिक स्थिरता

मंगल भात पूजा आर्थिक सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करती है. वित्तीय हानि से बचाव होता है और धन की प्राप्ति होती है. व्यवसाय और नौकरी में स्थिरता आती है.​

आध्यात्मिक विकास

पूजा से आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस मिलता है. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है और सकारात्मकता का संचार होता है. परिवार में शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है.

पूजा सामग्री

मंगल भात पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

  • चावल (भात) – पवित्रता का प्रतीक​

  • लाल फूल और लाल कपड़ा​

  • चना दाल​

  • मिठाई और फल​

  • मंगल यंत्र​

  • धूप, दीप और अगरबत्ती

  • नारियल और सुपारी

  • कलावा और रोली

उज्जैन में मंगल भात पूजा का विशेष महत्व

उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना जाता है, जो इसे मंगल भात पूजा के लिए सर्वाधिक प्रभावशाली स्थान बनाता है. मंगलनाथ मंदिर में सदियों से मंगल दोष पूजा की जाती रही है. मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति यहां की जाने वाली पूजा की प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ा देती है. उज्जैन ग्रह उपचार के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है.​

मंगल दोष के प्रकार

मंगल भात पूजा विभिन्न प्रकार के मंगल दोष के लिए प्रभावी है:

  • अंशिक मंगल दोष – आंशिक प्रभाव वाला दोष

  • संपूर्ण मंगल दोष – पूर्ण प्रभाव वाला दोष

  • निम्न मंगल दोष – कम तीव्रता का दोष​

  • उच्च मंगल दोष – उच्च तीव्रता का दोष जिसके लिए विशेष पूजा आवश्यक है​

कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति और अंश के आधार पर पूजा का प्रकार निर्धारित किया जाता है.​

पूजा के बाद के उपाय

मंगल भात पूजा के बाद निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

  • प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें

  • लाल रंग की वस्तुओं का दान करें

  • मंगल मंत्र का नियमित जाप करें

  • मंगल यंत्र को घर में स्थापित करें​

  • नियमित रूप से व्रत और उपवास रखें

  • गरीबों को भोजन कराएं

मंगल दोष की पहचान

यदि आपकी कुंडली में निम्नलिखित स्थितियां हैं तो मंगल दोष है:

  • मंगल ग्रह प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो

  • विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हों​

  • वैवाहिक जीवन में अशांति हो​

  • करियर और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हों​

कुंडली दिखाकर मंगल दोष की पुष्टि करवाना आवश्यक है.​

अर्क विवाह और कुंभ विवाह

मंगलनाथ मंदिर में अर्क विवाह (पीपल के पेड़ से विवाह) और कुंभ विवाह (घड़े से विवाह) की भी व्यवस्था है जो मंगल दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक है. ये विशेष अनुष्ठान मंगल भात पूजा के साथ किए जा सकते हैं.​

भक्ति रथ अनुष्ठान से बुक करें

भक्ति रथ अनुष्ठान में विद्वान और अनुभवी पंडितों द्वारा मंगल भात पूजा का आयोजन किया जाता है. हमारी टीम वैदिक विधि के अनुसार पूर्ण श्रद्धा और समर्पण से यह पूजा संपन्न कराती है. उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में की गई यह पूजा आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और मंगल दोष के सभी दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाएगी. हम आपकी कुंडली का विश्लेषण करके उचित पूजा विधि का निर्धारण करते हैं.