अर्क एवं कुंभ विवाह पूजा - भक्ति रथ अनुष्ठान, उज्जैन

अर्क विवाह क्या है?

अर्क विवाह एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है जो मांगलिक दोष से प्रभावित पुरुषों के लिए किया जाता है. इस विशेष पूजा में पुरुष का प्रतीकात्मक विवाह सूर्य पुत्री या पीपल/अर्क के पेड़ (मंदार वृक्ष) से कराया जाता है. जब किसी पुरुष की कुंडली में मंगल दोष हो या सप्तम भाव में शनि, राहु जैसे अशुभ ग्रह स्थित हों तो विवाह में देरी और वैवाहिक जीवन में समस्याएं आती हैं. अर्क विवाह संपन्न होने के बाद मंगल दोष के सभी नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और कुंडली शुद्ध हो जाती है.

कुंभ विवाह क्या है?

कुंभ विवाह मांगलिक दोष से ग्रस्त महिलाओं के लिए किया जाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. इस पूजा में महिला का प्रतीकात्मक विवाह मिट्टी के घड़े (कुंभ) से कराया जाता है जो देवता या वट वृक्ष का प्रतिनिधित्व करता है. विवाह की सभी परंपरागत रस्में – कन्यादान, फेरे और अन्य विधियां – पूर्ण होती हैं, जिसमें महिला पूर्ण दुल्हन की तरह तैयार होती है. विवाह संपन्न होने के बाद उस घड़े को तोड़ दिया जाता है या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, जो मंगल दोष के समाप्त होने का प्रतीक है.

अर्क विवाह कब और किसे करना चाहिए?

कुंडली में मंगल दोष

जब पुरुष की कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित हो. सप्तम भाव (वैवाहिक जीवन का कारक) में मंगल, शनि या राहु जैसे अशुभ ग्रह हों.​

विवाह में बाधाएं

विवाह में लगातार देरी हो रही हो और सभी प्रयास असफल हो रहे हों. विवाह के प्रस्ताव बार-बार टूट रहे हों. वैवाहिक जीवन में कलह और अशांति की आशंका हो.​

दूसरे विवाह का योग

कुंडली में दूसरे विवाह का योग हो. पहले विवाह में असफलता के बाद पुनर्विवाह की स्थिति हो.​

संतान संबंधी समस्याएं

मंगल दोष के कारण संतान प्राप्ति में कठिनाई हो. संतान के स्वास्थ्य से संबंधित चिंताएं हों.​

कुंभ विवाह कब और किसे करना चाहिए?

महिलाओं में मंगल दोष

जब महिला की कुंडली में मांगलिक दोष हो. प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल, शनि या राहु स्थित हों.​

विवाह में अवरोध

विवाह में देरी या चुनौतियां आ रही हों. विवाह के लिए उपयुक्त वर न मिल रहा हो.​

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए

वैवाहिक जीवन में संगतता और सामंजस्य सुनिश्चित करने के लिए. भावी पति के साथ सुखी और स्थिर विवाह के लिए.​

अर्क विवाह पूजा विधि

पूजा की तैयारी

सबसे पहले विद्वान ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर मंगल दोष की पुष्टि करें. शुभ मुहूर्त का निर्धारण करें. पूजा से एक दिन पहले या पूजा के दिन प्रातःकाल मंगलनाथ मंदिर पहुंचें. वर को सामान्य विवाह की तरह तैयार किया जाता है.​

पीपल या अर्क वृक्ष की पूजा

मंगलनाथ मंदिर या अंगरेश्वर मंदिर में पीपल/अर्क के पेड़ की पूजा की जाती है. वृक्ष को दुल्हन मानकर सभी वैवाहिक रस्में संपन्न की जाती हैं.​

संकल्प और गणेश पूजन

वर के नाम और गोत्र से संकल्प लिया जाता है. भगवान गणेश की पूजा करके विघ्न निवारण की प्रार्थना की जाती है.

मंगल पूजन और मंत्र जाप

भगवान मंगल की विशेष पूजा की जाती है. मंगल और सूर्य मंत्रों का जाप किया जाता है. “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का 108 या अधिक बार जाप होता है.​

वैवाहिक रस्में

पीपल/अर्क के पेड़ के साथ कन्यादान, फेरे और अन्य वैवाहिक रस्में पूर्ण की जाती हैं. वर पेड़ को दुल्हन मानकर सिंदूर, मंगलसूत्र आदि अर्पित करता है.​

पूर्णाहुति और प्रसाद

होम और हवन के साथ पूजा समाप्त होती है. ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दी जाती है. प्रसाद वितरण किया जाता है.

कुंभ विवाह पूजा विधि

दुल्हन की तैयारी

महिला पूर्ण श्रृंगार करके दुल्हन की तरह तैयार होती है. मंगलसूत्र, चूड़ियां, सिंदूर और विवाह के सभी अलंकार धारण किए जाते हैं.​

कुंभ (घड़े) की तैयारी

मिट्टी का घड़ा लाया जाता है जिसे वर मान लिया जाता है. घड़े को सजाया जाता है और उस पर वर का प्रतीक बनाया जाता है.​

संकल्प और पूजन

महिला के नाम से संकल्प लिया जाता है. गणेश पूजन और मंगल देव की पूजा की जाती है. मंगल निवारण मंत्रों का जाप होता है.​

कन्यादान और फेरे

माता-पिता घड़े को वर मानकर कन्यादान करते हैं. अग्नि के सात फेरे पूर्ण किए जाते हैं. सभी वैवाहिक मंत्रों का उच्चारण होता है.​

होम और विसर्जन

मंगल दोष निवारण होम किया जाता है. पूजा संपन्न होने के बाद घड़े को पानी से भरकर मंगल दोष निवारण मंत्रों का पाठ किया जाता है. फिर उस घड़े को धीरे से नदी या तालाब में प्रवाहित किया जाता है, जो दोष के समाप्त होने का प्रतीक है.​

अर्क विवाह के लाभ

मंगल दोष से मुक्ति

पुरुष की कुंडली से मांगलिक दोष पूर्णतः समाप्त हो जाता है. सप्तम भाव में स्थित अशुभ ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं.​

विवाह में सफलता

विवाह में आ रही सभी समस्याएं और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं. विवाह शीघ्र और बिना किसी रुकावट के संपन्न होता है.​

सुखी दांपत्य जीवन

वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है. वैवाहिक कलह कम होती है और संबंधों में मधुरता आती है.​

दीर्घायु और स्थिरता

जीवनसाथी की दीर्घायु सुनिश्चित होती है. विवाह में स्थिरता आती है और अलगाव की संभावना समाप्त होती है.​

संतान सुख

संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. मंगल दोष के कारण संतान से संबंधित समस्याओं का समाधान होता है.​

दूसरे विवाह की समस्या से मुक्ति

कुंडली में दूसरे विवाह के योग समाप्त हो जाते हैं. पुनर्विवाह की आवश्यकता नहीं रहती.​

ग्रह शांति और आध्यात्मिक लाभ

मंगल ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा जीवन में संचारित होती है. आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है. जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं.​

कुंभ विवाह के लाभ

मंगल दोष निवारण

महिला की कुंडली से मांगलिक दोष के सभी प्रभाव समाप्त हो जाते हैं. प्रथम पति के रूप में घड़े के साथ विवाह होने से दोष का प्रभाव उस पर चला जाता है.​

सुगम विवाह

विवाह में आने वाली रुकावटें और चुनौतियां दूर होती हैं. उपयुक्त वर की प्राप्ति होती है और विवाह शीघ्र संपन्न होता है.​

सुखी वैवाहिक जीवन

भावी पति के साथ सामंजस्य और संगतता सुनिश्चित होती है. वैवाहिक जीवन में प्रेम, समझ और खुशी बढ़ती है. पति-पत्नी के बीच कलह नहीं होती.​

पति की दीर्घायु

मंगल दोष के कारण पति की आयु पर आने वाले खतरे समाप्त होते हैं. जीवनसाथी स्वस्थ और दीर्घायु होता है.

आध्यात्मिक शुद्धि

यह अनुष्ठान आध्यात्मिक शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है. नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव से मुक्ति मिलती है.​

उज्जैन में अर्क एवं कुंभ विवाह का महत्व

उज्जैन को मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना जाता है, जो इसे मंगल दोष निवारण के लिए सर्वाधिक प्रभावशाली स्थान बनाता है. मंगलनाथ मंदिर में अर्क और कुंभ विवाह करवाने का विशेष महत्व है. अंगरेश्वर मंदिर भी अर्क विवाह के लिए प्रसिद्ध है. उज्जैन की आध्यात्मिक ऊर्जा और महाकाल की उपस्थिति इन अनुष्ठानों को अत्यंत प्रभावशाली बनाती है.

शुद्ध वैदिक विधि

सभी पूजा-अनुष्ठान पूर्ण रूप से शास्त्रसम्मत विधि से अनुभवी वेदाचार्यों द्वारा संपन्न किए जाते हैं।

अनुभवी ज्योतिषाचार्य मार्गदर्शन

कुंडली के अनुसार सटीक परामर्श एवं दोष-निवारण पूजा, जिससे निश्चित और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

सरल पूजा बुकिंग सुविधा

ऑनलाइन एवं फोन के माध्यम से आसान पूजा बुकिंग, तिथि-मुहूर्त निर्धारण और संपूर्ण पूजा व्यवस्था एक ही स्थान पर।

अर्क विवाह के लिए

  • लाल वस्त्र और फूल

  • मंगलसूत्र (प्रतीकात्मक)

  • चूड़ियां, सिंदूर

  • केला, मसूर दाल, लाल चंदन

  • धूप, दीप, अगरबत्ती

  • होम सामग्री – घी, तिल

  • नारियल, सुपारी

  • फल और प्रसाद

  • ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा

कुंभ विवाह के लिए

  • मिट्टी का घड़ा (कुंभ)

  • दुल्हन के लिए श्रृंगार सामग्री

  • मंगलसूत्र, चूड़ियां, सिंदूर

  • लाल वस्त्र और फूल

  • विवाह की सभी रस्मों की सामग्री

  • होम सामग्री

  • फल, मिठाई, प्रसाद

  • दान और दक्षिणा

अर्क और कुंभ विवाह के बाद के उपाय

नियमित उपाय

प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें. मंगल मंत्र का नियमित जाप करें. लाल वस्त्रों और मसूर की दाल का दान करें.

विवाह के समय विशेष ध्यान

अर्क/कुंभ विवाह के बाद सामान्य विवाह करें. विवाह के समय वैदिक विधि का पालन करें. विवाह के शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें.

दाम्पत्य जीवन में

पति-पत्नी आपसी समझ और प्रेम से रहें. नियमित रूप से पूजा-पाठ करें. परिवार में शांति और सामंजस्य बनाए रखें.

भक्ति रथ अनुष्ठान से अर्क एवं कुंभ विवाह बुक करें

भक्ति रथ अनुष्ठान में वैदिक परंपरा के अनुभवी और विद्वान पंडितों द्वारा अर्क एवं कुंभ विवाह पूजा संपन्न कराई जाती है. हमारी टीम उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर और अंगरेश्वर मंदिर में पूर्ण वैदिक विधि के साथ यह अनुष्ठान करवाती है. मंगल ग्रह की जन्मस्थली उज्जैन में की गई यह पूजा मंगल दोष के सभी नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करती है और सुखी वैवाहिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है.