गुरु चांडाल दोष एक अत्यंत विनाशकारी ज्योतिषीय योग है जो कुंडली में तब बनता है जब बृहस्पति (गुरु) और राहु एक ही भाव में एक साथ स्थित होते हैं. इस योग को चांडाल योग भी कहा जाता है क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह के शुभ प्रभावों को कम कर देता है. यह दोष कुंडली में मौजूद अन्य शुभ योगों को भी नष्ट कर देता है, जिससे जीवन में परेशानियों का सिलसिला शुरू हो जाता है. विशेष रूप से जब गुरु लग्न, पंचम, सप्तम, नवम और दशम भाव का स्वामी होकर चांडाल योग बनाता है तो इसके प्रभाव और भी गंभीर हो जाते हैं.
सभी पूजा-अनुष्ठान पूर्ण रूप से शास्त्रसम्मत विधि से अनुभवी वेदाचार्यों द्वारा संपन्न किए जाते हैं।
कुंडली के अनुसार सटीक परामर्श एवं दोष-निवारण पूजा, जिससे निश्चित और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
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गुरु चांडाल दोष से प्रभावित व्यक्ति को शिक्षा पूर्ण करने में कठिनाई होती है. मानसिक एकाग्रता और इच्छाशक्ति में अचानक गिरावट आती है. स्पष्ट विचार करने में कठिनाई होती है और गलत निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ती है. विवेक और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है.
व्यक्ति के व्यवहार और प्रवृत्ति में अचानक नकारात्मक बदलाव आते हैं. अच्छा स्वभाव अनियमित हो जाता है और बुरी संगति की ओर आकर्षण बढ़ता है. व्यक्ति अधीर, बड़ों के प्रति अनादरपूर्ण और असंवेदनशील बन जाता है. अनैतिक और अनैतिक कार्य करने की प्रवृत्ति विकसित होती है. छोटे रास्ते अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ती है जो बुरी संगति में ले जा सकती है.
यकृत (liver) से संबंधित समस्याएं, उच्च रक्तचाप और मधुमेह. पाचन संबंधी समस्याएं, पुराना कब्ज और पेट दर्द. ट्यूमर, पीलिया और पित्त संबंधी विकार. सिरदर्द, गुर्दे की समस्याएं और दुर्घटनाओं का खतरा. मानसिक तनाव जो मनोवैज्ञानिक या न्यूरोलॉजिकल विकारों के रूप में प्रकट हो सकता है. अत्यधिक सोच, चिंता और बेचैन मन.
परिवार में बार-बार झगड़े और कलह. व्यक्ति खुद को अलग-थलग करने लगता है. लोगों के साथ रहना और उनके साथ काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है. संबंधों में तनाव और वैवाहिक जीवन में समस्याएं. परिवार और रिश्तों में असामंजस्य.
वित्तीय हानि और धन की कमी. करियर, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में अस्थिरता. कड़ी मेहनत के बावजूद जीवन में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं होता. लालच और भौतिकवाद की प्रवृत्ति बढ़ती है. व्यावसायिक क्षेत्र में बाधाएं और असफलता.
मानसिक शांति और खुशी प्राप्त करना असंभव हो जाता है. तनाव और चिंता लगातार परेशान करती है. भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं. शुभ कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में बहुत कठिनाई होती है. जीवन में अनिश्चितता और अप्रत्याशित चुनौतियां.
पूजा से पहले विद्वान ज्योतिषी से कुंडली का विश्लेषण करवाना आवश्यक है. शुभ मुहूर्त का निर्धारण करें, विशेष रूप से गुरुवार का दिन इस पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. पूजा सामग्री की व्यवस्था करें और पवित्र स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें.
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें जो विघ्नहर्ता हैं. फिर व्यक्ति के नाम और गोत्र से संकल्प लिया जाता है. कलश स्थापना और पंचोपचार पूजन किया जाता है.
भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की विशेष पूजा की जाती है. राहु देव का आवाहन और पूजन किया जाता है. गुरु और राहु के बीज मंत्रों का जाप किया जाता है. पीले फूल, केला, हल्दी और पीली मिठाई से पूजन किया जाता है.
गुरु मंत्र: “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”
राहु मंत्र: “ॐ रां राहवे नमः”
इन मंत्रों का 108 बार या अधिक जाप किया जाता है. विशेष होम और हवन किया जाता है जिसमें पीली वस्तुओं की आहुति दी जाती है.
पूजा के अंत में पूर्णाहुति और आरती की जाती है. ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और दक्षिणा दी जाती है. पीले वस्त्र, हल्दी, चना दाल और केले का दान किया जाता है.
यह पूजा दोष के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सभी प्रभावों को दूर करती है. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है. पाचन तंत्र, यकृत और अन्य अंगों की समस्याएं कम होती हैं. जीवन शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि होती है.
शैक्षणिक और वित्तीय जीवन पर दोष के प्रभाव को कम करती है. शिक्षा पूर्ण करने में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है. वित्तीय स्थिरता और समृद्धि प्राप्त होती है.
यह पूजा वैवाहिक जीवन में शांति, सामंजस्य और आनंद लाती है. पति-पत्नी के बीच संबंधों में मधुरता आती है. परिवार नियोजन में सहायता मिलती है और संतान संबंधी समस्याओं का समाधान होता है.
पूजा व्यक्ति को नैतिकता, अनुशासन, धर्म और निष्ठा की ओर प्रवृत्त करती है. आध्यात्मिक संतुलन और विकास होता है. कर्म संबंधी बाधाएं दूर होती हैं. विवेक और बुद्धि में वृद्धि होती है.
तनाव, चिंता और भावनात्मक बोझ से मुक्ति मिलती है. मानसिक भ्रम समाप्त होता है और स्पष्टता आती है. मन की शांति और सकारात्मकता बढ़ती है. भावनात्मक स्थिरता और संतुलन प्राप्त होता है.
करियर में रुकावट और स्थिरता की समस्या समाप्त होती है. व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सफलता प्राप्त होती है. सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रवाह होता है.
प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें. गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें और पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करें. गाय को केला खिलाएं या पीले रंग की वस्तु का दान करें. केले के पेड़ की पूजा करें और जल चढ़ाएं.
प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पण करें और सूर्य की उपासना करें. माथे पर रोजाना केसर या हल्दी का तिलक लगाएं. गुरु और राहु मंत्रों का नियमित जाप करें. पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें और जल चढ़ाएं.
गरीबों और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र, हल्दी और चना दाल का दान करें. ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें. शिक्षा से संबंधित दान करें जैसे किताबें, कॉपी आदि. गौ सेवा करें और गाय को हरा चारा खिलाएं.
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. बृहस्पतिवार व्रत कथा का पाठ करें. “श्री विष्णु चालीसा” का नियमित पाठ करें. गुरु बीज मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें.
पीला पुखराज (Yellow Sapphire) धारण करें जो बृहस्पति का रत्न है. रत्न धारण करने से पहले विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें. रत्न को शुद्ध करके और मंत्र पाठ के साथ धारण करें.
उज्जैन महाकाल की नगरी है और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली है. महाकालेश्वर मंदिर के पास की गई पूजा विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जाती है. उज्जैन में वर्षों से गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा की परंपरा रही है. अनुभवी आचार्यों द्वारा वैदिक विधि से की गई पूजा दोष के सभी दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती है.
गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
पीले फूल (गेंदा, गुलाब)
केला, पीली मिठाई
हल्दी, चना दाल
पीले वस्त्र
कलश, नारियल, सुपारी
धूप, दीप, अगरबत्ती
रोली, अक्षत, चंदन
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
फल और प्रसाद सामग्री
गंगाजल
हालांकि गुरु चांडाल दोष मुख्य रूप से नकारात्मक माना जाता है, लेकिन यदि गुरु कुंडली में सही भाव या राशि में स्थित है तो यह दोष कुछ लोगों के लिए लाभकारी भी हो सकता है. ऐसे मामलों में व्यक्ति अपरंपरागत तरीकों से सफलता प्राप्त कर सकता है. हालांकि, इसका सही मूल्यांकन केवल विद्वान ज्योतिषी ही कर सकते हैं.
अपनी कुंडली में गुरु चांडाल दोष की पहचान के लिए:
विशेषज्ञ ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण करवाएं
देखें कि क्या बृहस्पति और राहु एक ही भाव में हैं
जीवन में ऊपर बताए गए लक्षण हों तो संभावना अधिक है
पारिवारिक इतिहास और पीढ़ीगत समस्याओं पर ध्यान दें
भक्ति रथ अनुष्ठान में वेद शास्त्र के जानकार अनुभवी आचार्यों द्वारा गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा संपन्न कराई जाती है. हमारी टीम उज्जैन में वैदिक विधि के अनुसार पूर्ण श्रद्धा और समर्पण से यह पूजा करवाती है. महाकाल की नगरी उज्जैन में की गई यह पूजा आपके जीवन से गुरु चांडाल दोष के सभी नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करेगी और जीवन में शांति, समृद्धि और सफलता लाएगी.
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